एक परिचय (स्वामी श्री धनञ्जय जी महाराज)
''स्वामी श्री धनञ्जय जी महाराज'' जो वैदिक आध्यात्मिक वाङ्गमयी व्यास परम्परा कि विलक्षण तथा रसमयी वाग्धारा को प्रवाहित करने वाले परम संत हैं । जो हास्यात्मक एवं कवित्व कला से परिपूर्ण भागवत कथा के माध्यम से भक्तों के मन को अनायास ही भगवान श्री मुरली मनोहर कृष्ण के श्री चरणों में लगा देते हैं ।।
स्वामी जी का जन्म काशी नगरी में स्थित काशी हिंदू विश्व विद्यालय (अस्पताल) में १८ जनवरी सन १९७५ को शुद्ध वैष्णव परिवार में हुआ, जहाँ आज भी कोई भी '''''शालिग्राम भगवान''''' को भोग लगाए बिना अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं करता ।।
स्वामी जी का जन्म काशी नगरी में स्थित काशी हिंदू विश्व विद्यालय (अस्पताल) में १८ जनवरी सन १९७५ को शुद्ध वैष्णव परिवार में हुआ, जहाँ आज भी कोई भी '''''शालिग्राम भगवान''''' को भोग लगाए बिना अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं करता ।।
पिता पं. श्री श्याम नारायण पाण्डेय एवं माता श्रीमती सुभद्रा देवी के यहाँ चौथे पुत्र के रूप में स्वामी जी का जैसे ही प्राकट्य हुआ, तरह-तरह कि उलझनों में उलझते परिवार को मानों शांति मिल गयी हो !!
स्वामी जी का लालन-पालन अपने पूर्वजों के पुराने घर सासाराम के निकट भदोखरा ग्राम (काशी से लगभग १०० किलोमीटर दूर) में ही हुआ । वहां घर में पुरे परिवार के साथ बैठकर रामचरित मानस कि चौपाइयों कि व्याख्या पांच वर्ष कि उम्र में ही करने लगे । अपने नानाश्री ''पं.श्री रामसिंहासन पाठक'' जी जो एक विद्यालय के अध्यापक थे उनके पास पहुंचे । जो व्याकरण, दर्शन, साहित्य तथा कर्मकांड के अद्भुत विद्वान है । उनकी संगती में रहकर महाराज श्री ने अपने जीवन का अमूल्य ज्ञान प्राप्त किया । भागवत जी का पूर्ण अध्ययन किया तथा गीता, मानस एवं अन्य सभी विषयों के साथ-साथ संस्कृत की शिक्षा ग्रहण की । समय-समय पर जहाँ-जहाँ विद्वान् गुरुजनों की संगती मिली वहाँ-वहाँ से शिक्षा ग्रहण की ।।
रामानुज वैष्णव संप्रदाय के संतों द्वारा किये जाने वाले (लक्ष्मी नारायण महायज्ञ) यज्ञों में प्रवचन सुनते-सुनाते एक दिन सद्गुरु के रूप में वैष्णवों एवं संतों के सिरमौर, श्री श्री लक्ष कोटि श्री से विभूषित श्री मद विश्वक्सेनाचार्य श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के अकिंचन शिष्य ''श्री श्री १००८ श्री लक्ष्मीप्रपन्न जियर स्वामी जी महाराज'' मिले । मानो गुरु के रूप में साक्षात परमात्मा ही मिल गए हों ।।
पूज्य गुरुदेव ''श्री श्री १००८ श्री जियर स्वामी जी महाराज'' ने विशिष्ट दीक्षा प्रदान की, और गुरुपद पर प्रतिष्ठित कर दिया तब से महाराज के जीवन की दिशा ही बदल गयी ।।
स्वामी जी को लगता था, कि मानो उन्हें कोई बुला रहा है, और सिलवासा स्थित ''''वेंकटेश स्वामी का मंदिर''' सिलवासा (यूनियन टेरेटरी, दादरा एवं नगर हवेली) पहुँच गए । आज भी वहीँ रहते हैं, भगवान की सेवा के साथ-साथ, श्रीमद् भागवत जी की कथा के माध्यम से धर्म का प्रचार नि:स्वार्थ भाव से करते हैं ।।
स्वामी जी को लगता था, कि मानो उन्हें कोई बुला रहा है, और सिलवासा स्थित ''''वेंकटेश स्वामी का मंदिर''' सिलवासा (यूनियन टेरेटरी, दादरा एवं नगर हवेली) पहुँच गए । आज भी वहीँ रहते हैं, भगवान की सेवा के साथ-साथ, श्रीमद् भागवत जी की कथा के माध्यम से धर्म का प्रचार नि:स्वार्थ भाव से करते हैं ।।
''स्वामी श्री धनञ्जय जी महाराज'' अग्नि देव के उपासक हैं । भगवान की सेवा और अग्निहोत्र उनके नित्य कर्म में शामिल है । विश्व कल्याण की भावना से ओतप्रोत उनके विचार है । स्वामी जी की अध्यक्षता में एक ट्रस्ट ''लोक कल्याण मिशन चेरिटेबल ट्रस्ट, सिलवासा'' का गठन किया गया है । जिसमें आप सभी को नि:स्वार्थ भाव से आमंत्रण है । धर्म प्रचार के इस अभियान में आप सभी सहभागी बनकर सुसंस्कृत समाज और देश के निर्माण में हमें सहयोग करें ।।
लोक कल्याण मिशन चेरिटेबल ट्रस्ट, सिलवासा (रजि. १३३३.) ।।
| Organization | : | LOK KALYAN MISSION CHARITABLE TRUST, SILVASSA. |
| Address | : | Shop No. - 19, Balaji Township, Opp-Tirupati Balaji Mandir, Amli, Silvassa |
| City | : | SILVASSA. |
| State | : | Dadra and Nagar Haveli |
| Country | : | India |
| ZipCode | : | 396230 |
| Contact-No | : | +91260 - 6538111. |
| Mobile-No | : | +91-9375288850 |
| Email Website | : : | swamidhananjaymaharaj@gmail.com www.dhananjaymaharaj.com |

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